मेहनत + धैर्य + दृढ़ निश्चय = स्टेनो में सफलता
कम समय में शॉर्ट हैण्ड स्टेनो सीखकर पाए सरकारी नौकरी
स्टेनोग्राफी एक लैंग्वेज है, इस लैंग्वेज को कोडिंग लैंग्वेज या शार्ट हैंड भी कहा जाता है | इसमें किसी स्पीच को शार्ट में लिखना सिखाया जाता है | इसका प्रयोग करने वाले व्यक्ति को स्टेनोग्राफर कहा जाता है, सरकार के लगभग सभी विभाग में स्टेनोग्राफर की आवश्यकता होती है | सरकारी विभाग में स्टेनोग्राफर पद पर नियुक्ति कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा की जाती है | यदि आप भी स्टेनोग्राफर बनना चाहते है, तो इस पेज पर स्टेनोग्राफर कैसे बने, योग्यता, सैलरी से सम्बंधित जानकारी के विषय में विस्तार से बताया जा रहा है |
(आशुलिपि, आशुलेखन, शीघ्रलेखन, त्वरालेखन ) हमारे यहां सभी स्टेनो पदों की तैयारी कराई जाती है। –
जैसे – ITI (NCVT) , DIPLOMA, MOM (POLYTECHNIC), SSC STENO GRADE C & D, HIGH COURT, CISF, IB, BSF, ASI , RRB, DRDO, ITBP, VYAPAM, AIR FORCE, PARLIAMENT REPORTER STENO, UPPCL STENO, UPSSSC STENO , SALES TAX STENO , DSSSB STENO , ISRO STENO , AIIMS STENO, ASRB.KVS,NAVY,DU , RAILWAY, CRPF ETC.
⇒ संस्था द्वारा टेस्ट एवं रेगूलर्टी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
⇒ ITI (NCVT एवं MOM पोलीटेक्निक) वाले छात्र/छात्राओं के लिए Steno Diploma की तैयारी कराई जाती है।
⇒ ITI वाले छात्र/छात्राओं को स्टेनो के साथ टाइपिंग, टेबल और Employment Skill की भी तैयारी कराई जाती है ।
आशुलिपिक (stenographer) में युवाओं के लिए अच्छा करियर है इस कोर्स को कक्षा 10 वीं के बाद किया जा सकता है, इसकी जरुरत हाई कोर्ट, एडमिनिस्ट्रेशन, मिनिस्ट्री रेलवे में होते हैं, इसके लिए व्याकरण ज्ञान होना आवश्यक है इसके १ वर्षीय कोर्स( आई टी आई) भी करवाई जाती है|
आशुलिपि का पहला प्रयोग पॉलीटेकनिक कॉलेज द्वारा मोन (मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट ) रोम में ६३ बी.सी में हुआ, रोम सीनेट में सिसरो आदि के भाषणो को नोट करने के लिए मार्क्स टुलियस टीरो ने इसका अविष्कार किया, जिसे टिेरोनियन नोटे कहा जाता था, इसके बाद चौथी शताब्दी में ग्रीस में शॉर्टहैंड का अविष्कार हुआ जिसका चलन आठवीं शताब्दी तक रहा |
वर्तमान शॉर्टहैंड का जन्मस्थान इंग्लैंड है, क्वीन एलिज़ाबेथ के समय ब्राइट्स (ब्राइट सिस्टम ) आशुलिपि (shorthand) का अविष्कार १६३० ईस्वी में टॉमस सेलडन ने किताब प्रकाशित कराई, उसके बाद जॉन ने “यूनिवर्सल इंग्लिश शॉर्टहैंड” नामक किताब प्रकाशित कराई| सर आइज़क पिटमैन ने १८३७ ईस्वी में “स्टेनोग्राफिक शॉर्टहैंड “नामक किताब प्रकाशित कराई जिसमे एवर और व्यंजनों को अलग अलग चिन्ह से निर्धारित किया गया और संक्षिप्त करने का भी नियम बनाया गया |
किसी भी Examination की तैयारी के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है, उस Exam के Syllabus, Question Paper Pattern और Eligibility Criteria को जानना. साथ ही Previous Year का Question भी देखें. पिछले कई Post में Exam Preparation से Related Post किया गया है आप Check कर सकते है. आज इस Post में हम जानेंगे SSC Stenographer Exam की तयारी कैसे करें?
आज के आधुनिक और आर्थिक युग में सभी अपने Future को Secure करना चाहते हैं. खास कर Students जिनके पास यह सोचने, समझने और उसे पूरा करने का पर्याप्त समय होता है. ऐसे में Government Job Students का First Choice होता है. इसके लिए वो Preparation भी करते हैं. लेकिन सफल सिर्फ वैसे Students ही हो पाते हैं, जो सही तरीके से पूरी ईमानदारी के साथ तैयारी करते हैं. किसी भी Exam की तैयारी में पढने के साथ – साथ Revision पर भी ध्यान देना चाहिए. SSC Stenographer Exam Qualify कर उम्मीदवार को विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों तथा विभागों में Job मिलती है.
Group X – Ministry / Central Government के Delhi में स्थित अधिकांश विभागों के लिये
Group Y – Central Government के Offices / Department पूरे देश भर के States and Union Territories में स्थित Subordinate / Attached Offices शामिल है.
हिन्दी आशुलिपि की रचना स्वर और व्यंजनों की ध्वनि के आधार पर की गई है जिन्हें विशेष ज्यामितीय रेखागणितीय चिह्नों से प्रदर्शित किया गया है। प्रशिक्षार्थियों की सुविधा के लिए व्यंजन रेखाक्षर जोड़े से दिये जा रहे हैं जो हल्के और गहरे होते हैं। व्यंजन रेखाक्षरों को लिखने की एक निश्चत विधि है जिसे किसी भी स्थति में परिवर्तित नहीं किया जासकता। रेखाक्षरों को लिखते समय उनकी लम्बाई, गहराई एवं दिशा पर विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है।
रेखाक्षर : किसी भी व्यंजन को प्रदर्शित करने वाली सरल अथवा वक्र रेखा को रेखाक्षर या व्यंजन संकेत कहते हैं। रेखाक्षर तीन प्रकार के होते हैं
जैसे:-
1.अग्रगामी रेखाक्षर horizontal strokes : रेखा के समानान्तर बायें से दायें की ओर लिखे जाने वाले रेखाक्षरों का अग्रगामी या समतल रेखाक्षर कहते हैं जैसे :- क वर्ग, मवर्ग, न वर्ग, ड; तथा ज्ञ ।
2. ऊर्ध्वगामी रेखाक्षर upward strokes :- नीचे से ऊपर की ओर लिखे जाने वाले रेखाक्षरों को ऊर्ध्वगामी रेखाक्षर कहते हैं जैसे:- य, र, ल, व, ह, ड़, तथा ढ़।
3. अधोगामी रेखाक्षर downward strokes :- ऊपर से नीचे की ओर रेखा तथा लिखे जाने वाले रेखाक्षरों को अधोगामी रेखाक्षर कहते हैं जैसे :- च वर्ग, ट वर्ग, त वर्ग, प वर्ग,श, ष , स, ड़, ढ़, ल , र, ह तथा त्र ।
⇒ त वर्ग ,श,स,ष तथा त्र दोनों तरफ से लिखे जाते हैं।
⇒ तीनों श,स, ष के लिए आशुलिपि में एक ही संकेत रखा गया है।
⇒ आशुलिपि में ण के लिए न संकेत से ही काम लिया जाता है।
⇒ ऋ आशुलिपि में र +ई री या ऋ को मिलाकर बनाया गया है।
⇒ क्ष व्यंजन क +ष=क्ष अर्थात क और ष से क्ष संकेत का निर्माण किया गया है। कभी -कभी आरंभ में छ ध्वनि से भी इसे लिखा जा सकता है।
⇒ श्र के संकेत को बनाने के लिए स +र=श्र का उपयोग किया गया है।
⇒ त्र व्यंजन आशुलिपि में त +र=त्र दोनों व्यंजनों को मिलाकर लिखने से त्र व्यंजन बनाया गया है।
⇒ 10 + 2 की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद किया जा सकता है। आप अपनी भाषा के अनुसार हिन्दी एवं English में सीख सकते हैं।
⇒ 12th के बाद स्टेनोग्राफी में बेहतरीन कैरियर बनायें।
⇒ यदि आप स्टेनोग्राफी के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं तो तुरंत ZINT संस्थान में ज्वॉइन करें।
⇒ सही और सरल तरीके से स्टेनो सीखना है तो तुरंत ZINT INSTITUTE ज्वॉइन करें।
⇒ कम समय में स्टेनो सीखकर पायें सरकारी नौकरी।
⇒ स्टेनोग्राफी सीखकर सरकारी परीक्षाओं में सफलता पाने का सुनहरा अवसर।
⇒ स्टेनोग्राफी सीखने के लिए तुरंत संपर्क करें।
⇒ स्टेनो के साथ टाइपिंग भी सिखाई जाती है।
⇒ शॉर्ट हैण्ड स्टेनो हिन्दी एवं English दोनों भाषाओं में सिखाई जाती है।
⇒ कमजोर छात्रों को क्लास के अलावा एक्स्ट्रा टाइम और एक्स्ट्रा क्लास दी जाती है।
⇒ कमजोर छात्र/छात्राओं को परफैक्ट सिखाना ही ZINT की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है।
⇒ स्टेनोग्राफर एवं टाइपिंग की ट्रैनिंग 10 साल अनुभवी शिक्षकों द्वारा दी जाती है।
⇒ हिन्दी एवं English दोनों आशुलिपि में प्रवीणता
⇒ बहुत ही अनुभवी स्टेनो प्रशिक्षक
⇒ साप्ताहिक एवं मासिक स्टेनो एवं टाइपिंग टेस्ट
⇒ स्टेनों में सर्वाधिक रिजल्ट देने वाला संस्थान
⇒ लघुस्टेनो ऑउटलाईन वाक्यांश
⇒ प्रतिदिन डिक्टेशन का लित्यान्तरण
⇒ उच्चगति के लिए विशेष बैच
⇒ एस.एस.सी. स्टेनो के लिए स्पेशल बैच
⇒ कमजोर छात्र/छात्राओं पर विशेष ध्यान
⇒ क्लास के अलावा प्रैक्टिस टाइम और एक्स्ट्रा टाइम
⇒ संस्था का संकल्प आपको सफल बनाने का
⇒ डिक्टेशन वाले छात्रों के लिए स्पेशल बैच
⇒ ITI स्टेनो डिप्लोमा वाले छात्रों का स्पेशल बैच
⇒ हमारे द्वारा कम्प्यूटर पर भी अनुवाद कराया जाता है ।
⇒ Exam से पहले रिवीजन कराया जाता है।
⇒एक क्लास में 10 -15 छात्रों को रखा जाता है ।
⇒ स्टेनो के बाद टाइपिंग कराई जाती है ।
⇒ टाइपिंग एक्स्पर्टों द्वारा सिखाई जाती है ।
⇒ क्लॉस के बाद प्रेक्टिस पर ज्यादा ध्यान देते हैं ।
⇒ यह 10वीं कक्षा के बाद किया जा सकता है।
⇒ Exam से पहले Minimum 2 times Revision कराया जायेगा
ऊर्ध्वगामी रेखाक्षर :- र, ड,ढ़,व, य, ह -30० कोण
अधोगामी रेखाक्षर :-च, छ, ज, झ, ह — 60० कोण
अधोगामी रेखाक्षर :-ट, ठ, ड,ढ —90० कोण
अधोगामी रेखाक्षर-प,फ,ब,भ, —120० कोण
हिंदी या इंग्लिश किसी भी भाषा में शॉर्टहैंड सीखने के बाद सरकारी नौकरी लगने के चांस ज्यादा होते हैं क्योंकि इन क्षेत्र में कंपटीशन कम होता है| राज्य स्तर पर और केंद्र स्तर पर स्टेनोग्राफर के सरकारी पद बहुत निकलते हैं| SSC खुद इन क्षेत्र में आवेदकों के लिए नोटिफिकेशन जारी करता है|
राज्य स्तर पर न्यायालय में स्टेनोग्राफर के पद निकलते हैं जोकि भाषाओं को तेज गति से लिखने के लिए बहुत जरूरी होता है
दूसरे क्षेत्रों में 10th और 12th pass करने के बाद नौकरी के लिए अप्लाई कर देते हैं और ऐसे में Compition बढ़ जाता है| स्टेनोग्राफर में आपको सबसे पहले स्टेनो और स्टेनो के साथ उसी भाषा में टाइपिंग भी सीखनी पड़ती है तब जाकर आप इस Stenographer पद के लिए कहां Apply कर सकते हैं
यहां पर एक बात जाना आपको बहुत ज्यादा जरुरी है अगर कोई हिंदी भाषा में स्टेनो सीख रहा है तो उसे Hindi भाषा की Typing भी आनी चाहिए
अगर कोई इंग्लिश भाषा की स्टेनो सीख रहा है तो उसको English में Typing आना जरूरी है
Zint Institute is a leading STENO HINDI training institute in Gwalior because we have 14+ years of knowledgeable and talented instructor which delivers real-time live STENO course training in Gwalior. We have designed this course for job seekers, students, working professionals and entrepreneurs.
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